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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

लवणस्य तथा दत्त्वा तामापदमनुत्तमाम् । किं गतश्चञ्चलारम्भः कश्चासावैन्द्रजालिकः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

चौथा सन्देह यह है कि राजा लवण को उस प्रकार की बड़ी भारी आपत्ति देकर चंचल कार्य करनेवाला वह एेन्द्रजालिक क्यों चला गया ओर वह कौन था २