Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 117, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 117, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 117 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
काश्चित्संसृतयो दीर्घ स्वप्नजाग्रत्तया स्थिताः ।
काश्चित्पुनः स्वप्नजाग्रज्जाग्रत्स्वप्नास्तथेतराः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई सृष्टियाँ दीर्घकाल तक स्वप्न-
जाग्रत् रूपसे स्थित हैं, कोई सृष्टियाँ स्वप्न जाग्रत् हैं और अन्य जाग्रत स्वप्न हैं