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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 119, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

ऊर्मिकात्वं मुधा भ्रान्तिर्मायैषा सत्स्वरूपिणी । रूपं तदेतदेवास्याः प्रेक्षिता यन्न दृश्यते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

अँगूठीपना जो है वह केवल भ्रान्ति है वह असत्स्वरूपिणी माया है। यदि असत्‌ का रूप कहा जाय तो वह अविचार समय तक रहनेवाली माया का रूप ही है, ऐसा कहते हैं। यदि उसको विचारकर देखा जाय, तो वह नहीं दिखाई देती यानी तुच्छ हो जाती है । इसलिए वह इस माया का ही रूप है