Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 12, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सत्तैव भावनामात्रसारा संसरणोन्मुखी ।
तदा वस्तुस्वभावेन त्वनुत्तिष्ठति तामिमाम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वैसे होने पर भी ब्रह्मसत्ता स्वरूप से विनष्ट नहीं होती, ऐसा कहते हैं।
उस समय ब्रह्मसत्ता ही केवल भावना से संसारोन्मुख होती है, विकार आदि क्रिया से
नहीं