Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 120, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 120, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 120 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अथ प्राप्य महाटव्यां पर्यन्ते धूमधूसरे ।
तमेव ग्रामकं यस्मिन्सोऽभवत्पुष्टपुल्कसः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर महावन में पहुँचकर उस वन के धुएँ से भरे हुए एक छोर पर उसी
गाँव में पहुँचा, जिसमें वह विशालकाय चण्डाल हुआ था