Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
यदैवाभ्युदिता विद्या त्वहंत्वादिमयी मुधा ।
तदैवानादिमध्यान्ता भ्रमस्यानन्ततोदिता ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
अहन्त्व आदि रूप मिथ्या ज्ञान जिस समय उदय को प्राप्त हुआ, उसी समय आदि, मध्य
तथा अन्त से हीन असंख्य भ्रम उदय को प्राप्त हो गये