Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अथवा लवणेनाशु दृष्टो यः स्वप्नविभ्रमः । स एव संविदं प्राप्तो विन्ध्यपुष्कसचेतसि ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा राजा लवण ने जो स्वप्नभ्रम देखा था, वही भ्रम विन्ध्यपर्वत के चण्डालों के चित्त में संविद्‌ को प्राप्त हुआ था