Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
असतो येऽनुवर्तन्ते चेतसोऽसत्यरूपिणः ।
व्योममारणकर्मैकनीतकालान्धिगस्तु तान् ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
अधिकारियों के प्रोत्साहन के लिए मूढे की निन्दा करते है ।
जो मूर्खज्ञ असत्य चित्त का अनुवर्तन करते हैं, आकाशताड़न में समय बितानेवाले उन
मूर्खो को धिक्कार हैं