Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 121, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

प्रातस्तत्र सभास्थाने मामपृच्छदसौ नृपः । कथमेवं मुने स्वप्नः प्रत्यक्षमिति विस्मितः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रातःकाल उस राजा ने विस्मित होकर सभाभवन में मुझसे पूछा : हे मुने, यह स्वप्न मैंने प्रत्यक्ष केसे देखा ?