Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 14, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
प्रधानशक्तिनियमः सुप्रतिष्ठो न चेद्भवेत् ।
तत्फलं शक्त्यधीनत्वान्नेहितानां क्वचिद्भवेत् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त क्रियाक्रम की भी फल सिद्धि प्रधान के संकल्प के अधीन ही है, ऐसा कहते हैं ।
यदि प्रधान शक्ति का नियम फलसिद्धि (कार्यसिद्धि) के अनुकूल न होगा, तो कार्यों की
हेतुभूत चेष्टाओं का भी कहीं पर फल नहीं होगा, क्योकि कार्यजनक चेष्टाएँ भी शक्ति के ही
अधीन हैं