Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 18, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
लीलोवाच ।
दृश्यते कारणात्कार्यं सुविलक्षणमम्बिके ।
अम्ब्वादातुमशक्ता मृद्धटस्तज्जस्तदास्पदम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त नियम में लीला ने व्यभिचार की शंका कर कहा ।
लीला ने कहा : माता, कारण से कार्य सर्वथा विलक्षण दिखाई देता है, मिट्ठी का ढेला
अपने में जल आदि धारण नहीं कर सकता पर उस से उत्पन्न घडा जल धारण करने में समर्थ
दिखलाई देता है, ऐसी परिस्थिति मे जैसे कार्य और कारण में तुल्य सामर्थ्य का नियम नहीं है
वैसे ही समानसत्ता का भी नियम नहीं है, यह आशय है