Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 2, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 2, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
मृत्युरुवाच ।
आकाशजस्य कर्माणि क्व स्थितानि वद प्रभो ।
धर्मराजोऽथ संचिन्त्य सुचिरं प्रोक्तवानिदम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
मृत्यु ने कहा : प्रभो, आकाशज विप्र के कर्म कहाँ हैं, यह बात आप मुझसे कहिए । मृत्यु के
यों पूछने पर धर्मराज ने चिरकालतक विचार कर उससे यह कहा