Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 20, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीदेव्युवाच ।
स ते भर्ताद्य संपन्नो द्विजो भूपत्वमागतः ।
या सावरुन्धती नाम ब्राह्मणी सा त्वमङ्गने ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीदेवीजी ने कहा : हे सुन्दरी, वही ब्राह्मण आज राजा होकर तुम्हारा पति बना है और
जो अरुन्धती नाम की ब्राह्मणी थी, वह तुम हो
सर्ग सन्दर्भ
उन्नीसर्वँ सर्ग समाप्त बीसवाँ सर्ग॑ प्राक्तन जन्म के चरितां के सुनने के उपरान्त भी ऐसा होना सम्भव नहीं है, यों सन्देह में पड़ी हुई लीला को दृष्टान्त और युक्तियों से देवी का प्रतिबोधन ।