Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 20, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
लीलोवाच ।
अष्टमे दिवसे विप्रः स मृतः परमेश्वरि ।
गतो वर्षगणोऽस्माकं मातः कथमिदं भवेत् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
लीला ने कहा : हे देवी, आज से
आठ दिन पहले उस ब्राह्मण की मृत्यु हुई थी और हमें उत्पन्न हुए अनेक वर्ष बीत चुके हैं, हे
माँ, वे ही दम्पती हम हैं, यह कैसे हो सकता है ?