Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 20, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 20, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तस्माद्भान्तिमयः कः स्यात्कोवा भ्रान्त्युज्झितो भवेत् सर्गो निरर्गलानर्थबोधान्नान्यो विजृम्भते ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

यों भ्रमरूप होने के कारण सभी सर्ग समान ही हैं, ऐसा कहते हैं। उस भ्रमरूप पूर्वसृष्टि से कौन सृष्टि भ्रान्तिरूप होगी और कोन भ्रान्ति से शून्य होगी ? इसलिए भ्रान्तिमय सृष्टि होती नहीं है