Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
लीलोवाच ।
ब्राह्मणब्राह्मणीरूपे सर्गे कारणसंस्मृतिः ।
कथमभ्युत्थिता सास्य स्मरणीयमिदं विना ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पहले यह कहा था कि यह सर्ग ब्राह्मण-ब्राह्मणी के सर्ग मे अभ्यस्त वासनाओ से
उत्पन्न है, उसमें लीला अनुपपत्ति की आशंका करती है ।
लीला ने कहा : देवी, ब्राह्मण ओर ब्राह्मणी रूप सर्ग में इस सर्ग का कारणभूत संस्कार,
पूर्व में अनुत्पन्न स्मरणयोग्य के पूर्वानुभव के बिना, कैसे उत्पन्न हुआ ? इस समय (राजसर्ग
में) जो वस्तुएँ हैं, वे पहले (ब्राह्मण-ब्राह्मणीरूप सर्ग में) नहीं थीं, अतः उस समय उनका
अनुभव हुआ यह नहीं कहा जा सकता पूर्व अनुभव न होने के कारण संस्कार रूप वासना उस
समय नहीं हो सकती, यह भाव है