Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
विशुद्धज्ञानदेहार्हास्तथैते पद्मजादयः ।
ब्रह्मात्मजगदादीनामंशे संस्थानमङ्गने ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्रे,
जैसे मैं देखती हूँ, वैसे ही ये ब्रह्मा आदि भी विशुद्ध चित्तरूपी देह से ब्रह्मदर्शन के योग्य
हैं, वे ब्रह्मरूप जगत् और जगत् के व्यवहारों की ब्रह्म के एक देश में स्थिति देखते हैं ।
“पादोऽस्य विश्वा भूतानि" (उसका एक हिस्सा सम्पूर्ण भूत हैं और अमृत तीन भाग
द्योतनात्मक स्वरूप में हैं) ऐसी श्रुति है