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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

आदिसर्गे जगद्भ्रान्तिर्यथेयं स्थितिमागता । तथा तदाप्रभृत्येवं नियतिः प्रौढिमागता ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मा के संकल्प से उत्पन्न इस जगत्‌ का हमारे संकल्प से जनित (सांकल्पिक) नगर से कोई अन्तर नहीं है क्योकि संकल्पजन्यत्व दोनों में समान ही है फिर उनमें परस्पर विलक्षणता कैसे हो गई ? ऐसा प्रश्न उपस्थित होने पर अनादि नियतिरूप ईश्वर की इच्छास्वरूप मायाशक्ति से उनमें विलक्षणता हुई है - ऐसा श्रीदेवीजी कहती हैँ । प्रथम सृष्टि मेँ यह जगत्‌भ्रान्ति जैसी दृढता को प्राप्त हुई थी, तभी से लेकर यह ईश्वरेच्छारूप मायाशक्ति वैसे ही दृढता को प्राप्त हुई है, भाव यह कि हमारे द्वारा संकल्पित नगर ओर ब्रह्मा द्वारा संकल्पित जगत्‌ की विलक्षणता में अनादि ईश्वरेच्छारूप मायाशक्ति ही हेतु हे