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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 56

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

वासनातानवं नूनं यदा ते स्थितिमेष्यति । तदातिवाहिको भावः पुनरेष्यति देहके ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

तो कब इसके पार्थिवभाव की (पृथिवी विकारता की) निवृत्ति होगी ? इस प्रश्न पर देवीजी कहती हैं। जब समाधि के अभ्यास से तुम्हारी वासना अल्प हो जायेगी, तब फिर आतिवाहिक भाव तुम्हारे शरीर में प्राप्त होगा