Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 21, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
एतावन्तं यदाकालं त्वयैतन्न विचारितम् ।
तदा न संप्रबुद्धा त्वं भ्रान्तैवाभव आकुला ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
कितने काल तक तुमने इसका विचार नहीं किया,
इसीलिए तुम्हें बोध नहीं हुआ, अतएव तुम ब्रह्म में भ्रमशालिनी हो, इसीलिए व्याकुल
हो