Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 26, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 26, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इति ते वरवर्णिन्यौ ततो ब्रह्माण्डमण्डलात् । निर्गत्यान्यदनुप्राप्ते यत्र तद्ब्राह्मणास्पदम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, वे दोनों ललनाएँ राजा पद्य जिसमें रहता था, उस ब्रह्माण्डमण्डल से निकल कर दूसरे ब्रह्माण्डमण्डल में, जिसमें उस वसिष्ठनाम के ब्राह्मण का घर था, पूर्वोक्त रीति से पहुँची

सर्ग सन्दर्भ

पवीसर्वौ सर्ग समाप्त छब्बीसवाँ सर्ग अपने घर मेँ अपने पुत्र आदि आत्मीयं को देखकर और उनका विलाप सुनकर उनके ऊपर लीला का अनुग्रह तथा जगत्‌ के तत्त्व का वर्णन ।