Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 27, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संसारमण्डले ह्यस्मिंस्तृतीयो वसुधाधिपः ।
महासंसारजलधिं पतितो भ्रममागतः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस संसारमण्डप में तुम्हारा तीसरा पति वसुधाधिपति है,
वह संसाररूपी महासागर में प्रविष्ट होकर भ्रम को प्राप्त हो गया है