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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 27, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

पृथ्व्यादिनाडीप्राणादिऋतेऽप्यभ्युदिता तयोः । सा संकथनसंवित्तिः स्वप्नसंकल्पयोरिव ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे स्वप्न और संकल्प मेँ पृथिवी आदि अधिभूत और नाडी, प्राण आदि से उपलक्षित शरीर के विना भी संवाद की प्रतीति होती है, वैसे ही अधिभूत (पृथिवी आदि) ओर अध्यात्म (नाडी, प्राण) आदि से उपलक्षित शरीर के बिना भी उनकी वह संवादप्रतीति हुई