Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 3, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 3, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यथाङ्कुरोऽन्तर्बीजस्य संस्थितो देशकालतः ।
करोति भासुरं देहं तनोत्येवं हि दृश्यधीः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि सम्पूर्ण दृश्य हृदय में है, तो अभी सबको उसका अनुभव क्यो नहीं होता ? इस पर
कहते हैं।
जैसे बीज के भीतर स्थित अंकुर देश और काल से अपने को प्रकाशित करता है, वैसे ही
दृश्यबुद्धि भी देश और काल से अपने स्वरूप को प्रकाशित करती है