Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 31, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 31, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
विद्याधरीमधुरमन्थरगीतिगर्भं मन्दारमाल्यवलनाकुलकामिनीकम् ।
विश्रान्तकान्तसुरसिद्धविमानपङ्क्ति व्योमोत्सवोच्चरितशोभमिवोल्ललास ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
विद्याधरो की अंगनाओं के मधुर ओर मन्द मन्द गायन से गुलजार,
मंदार के फूलों की मालाओं के गूथने में व्यग्र कामिनियोंसे युक्त और जिसमे देवता ओर सिद्धो
के सुन्दर सुन्दर विमानों की पंक्ति विश्राम ले रही थी, ऐसा आकाश, उत्सव के लिए बहुत बढी
चढ़ी शोभासे युक्त सा अत्यन्त शोभित था