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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

गीर्वाणगणगोष्ठीषु प्रवृत्ताः संकथा मिथः । कदा लोकान्तरं धीराः कथं यास्यन्ति के कुतः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

देवगणों की गोष्ठियों में परस्पर यह चर्चा चली थी कि कौन धीर पुरूष, कब, कैसे और किसलिए स्वर्ग आदि लोकों में जायेंगे