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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 34, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

कटेषु करिणां कीर्णा धारानाराचराजयः । पतिता इव संपूर्णाः शृङ्गसंघेषु वृष्टयः ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

हाथियों के गण्डस्थलोमें बिखरे हुए धाराकार बाणों की पंक्तियाँ पर्वतों के शिखरों पर गिरी हुई सम्पूर्ण वृष्टियों के समान शोभित होती हैं