Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
भुशुण्डीमण्डलोद्द्योतश्यामार्कोत्पातभीरुषु ।
आभीरेष्वरयः पेतुर्गोगणा हरितेष्विव ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्डीनामक
हथियार के मण्डल की कान्ति से कालिमा को प्राप्त सूर्य ही ठहरा एक उत्पात (>) (अशुभ
सूचक चिह्न), उससे भयभीत आभीर देशवासियों पर शत्रु ऐसे टूटे, जैसे हरी घास पर गौओं
का झुण्ड टूट पड़ता है