Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 40, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
नहि वार्यूर्ध्वमायाति नाधो गच्छति पावकः ।
या यथैव प्रवृत्ता चित्सा तथैव प्रतिष्ठिता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
बाहर भी वस्तुशक्ति का स्वभाव वैसे ही एकरूप देखा गया है, ऐसा कहते हैं ।
जैसे जल कभी ऊपर को नहीं जाता और अग्नि कभी नीचे को नहीं जाती, वैसे चिति का
भी जैसा स्वभाव है, वैसी ही वह रहती है