Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 40, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
यदेवाम्बु स आवर्तो नत्वस्यावर्त वस्तु सन् ।
द्रष्टैवास्ते दृश्यमिव दृश्यं नत्वस्ति वस्तु सत् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त बात का ही दृष्टान्तो से समर्थन करते हैँ ।
जो जल है वही आवर्त है यानी आवर्त जल से अतिरिक्त नहीं हे, किन्तु आवर्त वस्तु सत्
(यथार्थ) नहीं है, वैसे ही द्रष्टा ही दृश्य की नाई स्थित है दृश्य कोई वास्तविक पदार्थ नहीं
है