Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
देव्यौ युष्मत्प्रसादोऽयं भवत्योरपि यत्पुरः ।
वक्तुं शक्नोमि तद्देव्यौ श्रूयेतां जन्म मत्प्रभोः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देवियों,
यह आप लोगों का ही प्रसाद है कि जो मैं आपके सामने भी बोलने में समर्थ हो रहा हूँ । अतः हे
देवियों, आप लोग मेरे स्वामी का जन्म सुनिए