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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

सुविकासं च हृदयं ज्ञप्तिस्पर्शोदयेऽभवत् । सस्मार पूर्ववृत्तान्तमन्तः स्फुरदिव स्थितम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

देवी सरस्वती के स्पर्श करने पर राजा पद्म का हृदय बाहर-भीतर प्रकाशपूर्ण हो गया । राजा ने अपने पूर्व जन्मों के वृत्तान्त का, जो कि स्फुरित होता हुआ सा अन्तःकरण में स्थित था, स्मरण किया