Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
कुमार्या मन्त्रिणा चैव त्वया च प्राक्तनं पुरम् ।
आगन्तव्यं शवीभूतं प्राप्तव्यं तच्छरीरकम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्
अविवाहित राजकुमारी को और मन्त्री को पूर्वजन्म का नगर प्राप्त होगा और आपको
शवरूप वह शरीर प्राप्त होगा