Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अहो शरशिलाशक्तिकुन्तप्रासासिहेतयः ।
जालसंध्याभ्रपटलं विशन्ति शलभा इव ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
अहा, बाण, पत्थर, शक्ति,
भाले, प्रास, तलवार, आदि शस्त्रासत्र झरोखों के जालरूपी सन्ध्याकालीन मेघवृन्द में
टिड्डियों की नाई घुस रहे हैं