Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 46, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
शनैः सेनां समाकर्षन्नाज्ञायत बलान्तरम् ।
विवेशपक्षप्रोड्डीनो मेरुरेकमिवार्णवम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी सेना को श्रुवाहिनी के साथ भिड़ाने के लिए ले जा रहे राजा विदूरथको
अपनी सेना ओर शत्रु सेना का बलाबल ज्ञात नहीं हुआ । जैसे अपने परो से उड़ा हुआ सुमेरु
पर्वत प्रलयकालीन एकार्णव में प्रवेश करे, वैसे ही उसने भी शत्रु के ओर अपने बल का अन्तर
जाने बिना ही शत्रु के दल-बल में प्रवेश किया