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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, Verses 8–9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 47, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 8,9

संस्कृत श्लोक

जयाम्यहं स्यां संग्राम इत्यनेनास्मि पूजिता । तस्माद्विदूरथो देहं तत्प्राप्य सह भार्यया ॥ ८ ॥ त्वयानया च कालेन बाले मुक्तो भविष्यति । एतदीयः स्वयं शत्रुः सिन्धुर्नाम महीपतिः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे बाले, इसलिए राजा विदूरथ उस देह को पाकर तुम्हारे ओर इस भार्या के साथ समय आने पर मुक्त होगा ओर इसका शत्रु राजा सिन्धु इसको मारकर विजयी हो पृथ्वीतल में स्वयं राज्य करेगा