Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verses 24–25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verses 24–25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 24,25
संस्कृत श्लोक
अथादधे मोहनास्त्रं सिन्धुर्गन्धर्वसौहृदात् ।
प्राप्तं तेन ययुर्लोका विना मोहं विदूरथात् ॥ २४ ॥
व्यस्तशस्त्राम्बरा मूका विषण्णवदनेक्षणाः ।
मृता इवाभवन्योधाश्चित्रन्यस्ता इवाथवा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त राजा सिन्धु ने गन्धर्वो की मित्रता से प्राप्त विमोहनास्त्र का धनुष में
सन्धान किया, उससे विदूरथ के सिवा उसके पक्ष के सब लोग मोह को प्राप्त हो गये ।
विमोहनास्त्र से राजा विदूरथ के सैनिकों के अस्त्र-शस्त्र ओर वस्त्र अस्त-व्यस्त हो गये थे,
मूँह से वचन नहीं निकलता था, मूँह ओर नेत्रो मे विषाद छा गया था तथा वे मृत से हो गये
अथवा चित्रलिखित से हो गये थे