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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

सिन्धोरपि तथैवासीच्छक्तिर्लाघवमेव च । वरेण वरदस्यैवं विष्णोर्धानुष्कता तयोः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा सिन्धु की भी शक्ति ओर हस्तलाघव राजा विदूरथ के समान ही थे । उनकी ऐसी आश्चर्यमय धनुर्यद्ध में कुशलता स्वाभाविक नहीं थी, किन्तु वर देने वाले भगवान्‌ श्रीविष्णु के वरदान से वह प्राप्त हुई थी