Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अथ सिन्धुर्मुमोचास्त्रमाग्नेयं ज्वलिताम्बरम् ।
जज्वलुः ककुभस्तेन कल्पाग्निज्वलिता इव ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर राजा सिन्धु ने आग्नेयारत्र, जिसने आकाशको
प्रज्वलित कर दिया था, छोड़ा, उससे दिशाएँ प्रलयकालीन अग्नि से जलाई गई सी जलने
लगी