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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 72

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 72

संस्कृत श्लोक

अथ मूर्खरुषा तुल्यस्तापः संतापयन्प्रजाः । जजृम्भे झर्झराकीर्णवनविस्तारकर्कशः ॥ ७२ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर मूर्ख के क्रोध के सदुश लोगों को क्लेश पहुँचा रहा सूर्यताप, जोकि सूखे हुए पत्तों से इधर उधर चारों ओर व्याप्त विशाल वनों से अधिक कठोर हुआ था, खूब बढ़ने लगा