Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
विदूरथाच्छरासारा अजस्रमभिनिर्ययुः ।
अब्धेरिव पयःपूराः सूर्यादिव मरीचयः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे समुद्र से जलप्रवाह सदा
निकलते रहते हैं और जैसे सूर्य से किरणें निरन्तर निकलती रहती हैं, वैसे ही राजा विदूरथ से
बाणों की मूसलाधार वृष्टि निरन्तर निकलती गई