Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 53, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
प्रबुद्धलीलोवाच ।
अमुनैव शरीरेण किमर्थं न गता पतिम् ।
एषा वरेण संप्राप्ता लीला ललितवादिनी ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रबुद्ध लीला ने कहा : हे देवी, यह मधुरभाषिणी लीला,
जिसे आप पति के पास पहुँच गई कहती है, आपके वरदान के प्रताप से इस स्थूल शरीर से ही
पति के पास क्यो नहीं गई ?