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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 53, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

कुमार्युवाच । दुहितास्मि सखि ज्ञप्तेः स्वागतं तेऽस्तु सुन्दरि । प्रतीक्षमाणा त्वामेव स्थितास्मीह नभःपथि ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

कुमारी ने कहा : हे सरस्वती देवी की सखी, मैं तुम्हारी कन्या हूँ, हे सुन्दरी, आपका स्वागत हो । मैं तुम्हारी प्रतीक्षा में ही यहाँ आकाशमार्ग में स्थित हूँ