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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

यदा व्यथावशान्नाड्यः स्वसंकोचविकासनैः । गृह्णन्तिमारुतो देहे तदोज्झति निजां स्थितिम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

जब नाडियाँ पीडावश हुए संकोच-विकास से खाये ओर पीये गये पदार्थो के रस को विषमता के साथ ग्रहण करती हैं, तब समान नाम का वायु खाये-पीये गये पदार्थो के रस के समीकरणरूप अपने काम को छोड़ देता हे