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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

यथा लतायाः पर्वाणि दीर्घाया मध्यमध्यतः । तथा चेतनसत्ताया जन्मानि मरणानि च ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे लम्बी दूब आदि की लताओं के बीच- बीच में गाँठें होती हैं, वैसे ही चेतनसत्ता के मध्य मेँ जन्म ओर मरण होते हैं