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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verses 27–28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 55, verses 27–28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 27,28

संस्कृत श्लोक

आदौ मृता वयमिति बुध्यन्ते तदनुक्रमात् । बन्धुपिण्डादिदानेन प्रोत्पन्ना इति वेदिनः ॥ २७ ॥ ततो यमभटा एते कालपाशान्विता इति । नीयमानः प्रयाम्येभिः क्रमाद्यमपुरं त्विति ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

अब उनका मरण आदि अध्यारोपक्रम विशेषरूप से दशाति हैं । प्रेत पहले हम लोग मरे, तदनन्दर दाह, दशाहकृत्य आदि के क्रम से हम लोगों का शरीर बना, यह जानते हैं । तदनन्तर वे जानते हैं कि हाथों में कालपाश लिए हुए ये यमदूत हैं, इन यमदूतों द्वारा ले जाया जा रहा मैं, जो कि पाथेय श्राद्ध आदि से तृप्त किया गया हूँ, एक वर्ष में यमपुरी को जाता हू