Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 57, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

भ्रान्तिमात्रं तु देहात्मा तेषां तदुपशाम्यति । सत्यबोधेन रज्जूनां सर्पबुद्धिरिवात्मनि ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

दूसरी बात यह है कि योगियों को जब ज्ञानप्राप्ति होती है, उसी समय उनकी देह आदि का बाध हो जाता है, इसलिए उनकी दृष्टि से उनकी जीवितदशामे भी उनका शरीर नहीं रहता है, ऐसा कहते हैं। देह में आत्मबुद्धि केवल भ्रान्ति ही है, आत्मतत्त्व का ज्ञान होने से उनकी अपने में वह भ्रान्ति रस्सी का ज्ञान होने से रज्जु में सर्पबुद्धि के समान नष्ट हो जाती है