Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 58, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
अस्माकं पुण्यसंभारैरिह साक्षादुपागता ।
अनयेमे पराल्लोकादिहानीते महीपते ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
हम लोगों के पुण्यों की प्रचुरता से यह साक्षात्
यहाँ पर उपस्थित हैं । हे राजन्, ये ही हम दोनों को परलोक से यहाँ लाई हैँ ॥