Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 60, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
पत्रपुष्पफलांशात्मा यथैकः स्वास्थितो द्रुमः ।
अनन्तसर्वशक्त्यात्मा ह्येक एव तथा विभुः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
विवेकद्ृष्टि से प्रपंच की पृथक् सत्ता का अभाव कह कर मायिक दष्ट से भी उसकी पथक्
सत्ता नहीं है, ऐसा कहते हैं।
जैसे पत्ते, फूल, शाखा आदि अंशों से युक्त वृक्ष एकरूप से ही स्थित है, वैसे ही अनन्त
सर्वशक्तिरूप परमात्मा एकरूप से ही स्थित है