Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 61, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
चिद्रह्म यद्यथा येन बुध्यते स्वात्मनात्मनि ।
तत्तत्तथा नु भवति सर्वं सर्वाङ्गशक्तिमत् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
चैतन्यरूप जो ब्रह्म है, उसको ज्ञानी लोग अपने आत्मरूप
से अपने में जैसा जैसा जानते हैँ, वैसा-वैसा यानी उस उस प्रकार का वह ब्रह्म आत्मा में
होता है यानी माया से तत् तत् सब आकारो को धारण करता है, क्योकि वह सवनुगुण
मायारूप शक्ति से युक्त हे